सोलर लगवाने के बाद सबसे ज़रूरी कदम है नेट मीटर — वही मीटर जो आपका बिल लगभग शून्य कर देता है। यह गाइड पूरी प्रक्रिया आसान हिंदी में समझाती है।
नेट मीटरिंग है क्या?
सोलर प्लांट दिन में बिजली बनाता है। दिन में जितनी बिजली आप खर्च नहीं करते, वह ग्रिड (DISCOM) को चली जाती है — और आपका मीटर उल्टा चलने लगता है। रात में जब प्लांट काम नहीं करता, आप ग्रिड से बिजली लेते हैं और मीटर सीधा चलता है। महीने के अंत में हिसाब बराबर होता है: दिन की अतिरिक्त बिजली − रात की खपत = आपका बिल। धूप वाले राजस्थान में यह बिल 80–100% तक कम कर देता है।
राजस्थान में प्रक्रिया — 6 आसान स्टेप
- साइट सर्वे — छत की नाप, छाया विश्लेषण, लिखित कोटेशन
- सब्सिडी आवेदन — pmsuryaghar.gov.in पर पंजीकरण (हम भरते हैं)
- DISCOM मंज़ूरी — बिजली लोड और सिंगल-लाइन डायग्राम जमा
- इंस्टॉलेशन — 2–5 दिन में प्लांट तैयार
- नेट मीटर लगना — जांच के बाद DISCOM बाई-डायरेक्शनल मीटर लगाता है; राजस्थान का नियम: अधिकतम 15 दिन
- सब्सिडी क्रेडिट — ~30 दिन में ₹78,000 तक DBT से खाते में
आपका DISCOM कौन सा?
| क्षेत्र | DISCOM | जिले |
|---|---|---|
| जयपुर व पूर्वी राजस्थान | JVVNL | जयपुर, दौसा, सीकर, अलवर, भरतपुर, करौली, सवाई माधोपुर |
| अजमेर व मध्य | AVVNL | अजमेर, कोटा, बीकानेर, टोंक समेत |
| जोधपुर व पश्चिमी | JdVVNL | जोधपुर, उदयपुर, जैसलमेर, पाली, बाड़मेर समेत |
ज़रूरी दस्तावेज़
- आधार कार्ड (OTP के लिए मोबाइल लिंक)
- नवीनतम बिजली बिल
- पता प्रमाण
- बैंक पासबुक / रद्द चेक (सब्सिडी के लिए)
- छत के स्वामित्व का प्रमाण
आम सवालों के जवाब
क्या 5 kW तक के लिए 3-फेज़ कनेक्शन चाहिए?
नहीं — 5 kW तक का प्लांट सिंगल-फेज़ कनेक्शन पर चल जाता है। 5 kW से ऊपर DISCOM आमतौर पर 3-फेज़ माँगता है, उसका पेपरवर्क भी हम कर देते हैं।
महीने की बची हुई यूनिट का क्या होता है?
बची हुई यूनिट अगले महीने के बिल में समायोजित हो जाती है। सालाना सेटलमेंट के नियम DISCOM के हिसाब से थोड़े अलग हैं — हमारी टीम सर्वे के समय आपका टैरिफ समझा देती है।
पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगता है?
आमतौर पर 2–4 हफ्ते: मंज़ूरी ~1 हफ्ता, इंस्टॉलेशन 2–5 दिन, नेट मीटर ≤15 दिन, सब्सिडी ~30 दिन।